BhaktiVed
ॐ

जुओ ने गगना हेरी

భజనరచన: ખીમ સાહેબ (Khim Saheb)

जुओ ने गगना हेरी

जुओ ने गगना हेरी त्यां बंसरी बाजे घेरी घेरी...

जुओ ने गगनां हेरी त्यां बंसरी बाजे घेरी घेरी...

तरवेणीमां टंकशाळ पडत है, ता पर झीणी शेरी ,

अखर अजीता आसन बेठा, नगर बसाया फेरी...

- कोई जुओने गगनमां हेरी....०

घडी घडीनां घडीयाळां वागे, झीणी झीणी वागे सूर घंटेरी,

ढोल नगारां शरणायं वागे, धूम मची हे चो फेरी...

- कोई जुओने गगनमां हेरी....०

गगन मंडळ में कर ले वासा, वहां हे जोगी एक लहेरी,

नूरते सरते नाम नीरख ले , सखमणा माळा फेरी...

- कोई जुओने गगनमां हेरी....

स्वास उच्छवास दोनं नहीं पहोंचे , वहां ले' लागी मेरी,

सतगरए मं ने सान बतावी , जाप हे अजपा केरी...

- कोई जुओने गगनमां हेरी....०

साचा सतगर नेणे नीरख्या, मीट गई रेन अंधेरी,

खीमदास गर्‌ भाण प्रतापे,अब चोट नहीं जम केरी...

- कोई जुओने गगनमां हेरी....०

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