BhaktiVed
माता

ज्यां लगी आत्मा तत्व

prabhatiyaरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)

ज्यां लगी आतमा तत्व चिंतयो नहीं, त्यां लगी साधना सर्व जूठी;

मानुष-देह तारो, एम एळे गयो, मावठानी जेम वृष्टि वूठी. ज्यां०

शु थयुं स्नान, सेवा ने पूजाथकी, शुं थयुं घेर रही दान दीधे;

शु थयुं धरि जटा भस्म लेपन कर्ये, शुं थयुं वाळ लोचन कीधे. ज्यां०

शुं थयुं तप ने तिरथ कीधा थकी, शुं थयुं माल ग्रही नाम लीधे;

शुं थयुं तिलक ने तुलसी धार्याथकी, शुं थयुं गंगजल पान कीधे. ज्यां०

शुं थयुं वेद व्याकरण वाणी वदे, शुं थयुं राग ने रंग जाणे;

शुं थयुं खट्‌दर्शन सेवाथकी, शुं थयुं वरणना भेद आणे. ज्यां०

ए छे परपंच सहु पेट भरवातणा, आत्माराम परिब्रह्म न जोयो;

भणे नरसैंयो के, तत्त्वदर्शन विना, रत्नचिंतामणि जन्म खोयो. ज्यां०

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