BhaktiVed
Krishna

Kanude Vanman Lunti, Sakhi !

BhajanAuthor: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

कानुडे वनमां लूंटी, सखी !

कानुडे वनमां लूंटी सखी !

मुने कानुडे वनमां लूंटी.

हाथ झाली मारी बाह्य मरोडी,

मोतीनी माळा तूटी.

आगळथी मारो पालवडो साह्यो,

महीनी मटूकी झूंटी.

पाछळ पडे तेनो केडो न मूके,

नासी शक्यां नहीं छूटी.

बाइ मीरां के प्रभु गिरिधर नागर,

कहीए तो लोक कहे जूठी.

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