BhaktiVed
Krishna

Karmanki Gat Nyari

BhajanAuthor: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

कर्मनकी गत न्यारी

ओधवजी कर्मनकी गत न्यारी, देखो बत ह्रदयमें वीचारी,

ओधवजी कर्मनकी गत न्यारी. ए टेक

नीर्मळ नीरका नाना सरोवर, समुद्र हो रही खारी,

बगलेकुं बहोत रूप दीआ हय, कोयल कर दीनी कारी. ओ० १

सुंदर लोचन मृगकुं दीआ हय, बन बन फीरत दु:खारी;

मूरख राजा राज करत हे, पंडित भयेहे भीखारी. ओ० २

वेश्याकुं पाट पितांबर पेरन, सतीयनकुं नहीं सारी;

सुंदर नार वांझण कर डारी, भुंडण जण जण हारी. ओ० ३

सुमकुं अन धन बहोत दीयो हे, दाता कुं न मळे जुआरी;

मीरां कहे प्रभु गीरधरना गुण, चरन कमल बलीहारी. ओ० ४

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