BhaktiVed
Krishna

Kesar Bhina Kanji

BhajanAuthor: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)

केसरभीनां कानजी, कसुंबे भीनी नार;

लोचन भीनां भावशुं, ऊभां नंदद्वार.

बेमां सुंदर कोने कहीए, वनिता के व्रजनाथ;

निरखुं परखुं पुरुषोत्तमने, माणेकडां बेहु हाथ

वेगे कुंज पधारिया, लचके थई झकझोळ;

नरसैंयानो स्वामी भले मळ्यो, रंग तणां बहु रोळ

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