BhaktiVed
माता

कोई गोती देजो रे

garba

कोई गोती देजो रे

कोई गोती देजो रे, कोई गोती देजो रे;

म्हारा का’न कुंवरियानी झूलडी,

म्हारा श्याम सुंदरियानी झूलडी.

साव रे सोना केरी झूलडी, मांही रूपा केरा धागा;

अवर लोकने ओपे नहि, म्हारा का’नकुंवरजीना वाधा रे !

— म्हारा.

शेरीए शेरीए साद पडावुं ने धर धर हालु छुं जोती;

ए रे झूलडीमा कांई नथी बीजुं, एने छेडे कळायल मोती रे !;

— म्हारा.

माता ज्शोदाजी मही वलोवे ने का’नो वळग्यो कोटे,

ए रे झूलडीने कारणिये, म्हारो लाडकवायो लोटे रे,

— म्हारा.

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