BhaktiVed
कृष्ण

कोई कछु कहै मन लागा

भजनरचना: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

कोई कछु कहै मन लागा

कोई कछु कहै मन लागा.

ऐसी प्रीति लागी मन मोहन,

जस सोने में सुहागा;

जनम जनम का सोवे ये मनवा,

सद्दगुरु शब्द सुनि जागा. ... कोई कछुं कहै.

मात, तात, सुत, कुटुंब-कबीला,

तूट गया जैसे धागा; ... कोई कछुं कहै.

मीरां के प्रभु गिरधर नागर,

भाग्य हमारा जागा. ... कोई कछुं कहै.

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