BhaktiVed
कृष्ण

कोईना जाणे हरिया

भजनरचना: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

कोई ना जाणे हरिया, तारी गति कोई ना जाणे हरिया.

मिट्टि खात मुख देखा जसोदा, चौद भुवन भरिया. तारी०

पडी पाताळ काळी नाग नाथ्यो, सूर ने शशी डरिया. तारी०

डूबत व्रज राख लियो हे, कर गोवर्धन धरिया. तारी०

मीरां के प्रभु गिरिधरना गुण, शरणे आये सो तरिया. तारी०

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