BhaktiVed
कृष्ण

कोण पुन्ये करी

भजनरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)

कोण पुन्ये करी नार हुं अवतरी, श्रीहरि दीन थई मान मागे;

अमर अवगति कहे, अकल को नव लहे, ते कमलावर कंठ लागे.

यज्ञ यागे यजी योग ध्याने धरी, बहु व्रत आदरी देह कष्टे;

तोय ते श्रीहरी, स्वप्ने न पेखीए, ते हरी निरखीए प्रेम दृष्टे.

शेष सुखासन शेज सदा सही, भुवन जस्ं वैकुठ काहावे;

ते पें अधिक जे मंदीर माहरूं, प्रेमे पीतांबर पलंग आवे.

भगतवछलतणुं बिरद पोते वहे, वेद पुराण एम शास्त्र वाणी;

नरसिंहाचो स्वामी भलेरे मळियो, कीधी कृपा मुने दीन जाणी.

इस पाठ का वीडियो नहीं है।YouTube पर खोजें

ये भी पढ़ें