BhaktiVed
ॐ

Kupatrani Pase Vastu Na Vavie

BhajanAuthor: ગંગાસતી (Gangasati)

कुपात्रनी पासे वस्तु ना वावीए

कुपात्रनी पासे वस्तु ना वावीए रे,

ने समजीने रहीए चुप रे,

लालच आपे ने द्रव्य करे ढगला रे,

भले होय श्रीमंत के भूप रे …. कुपात्रनी पासे

भजनी जनोए भक्तिमां रे’वुं ने,

करवो स्मरण निरधार रे….

अज्ञानी आगळ नव उच्चरवुं ने,

बांधवा सूरता केरा तार रे … कुपात्रनी पासे

उपदेश देवा तो प्रथम भक्ति देखाडवी

ने गाळी देवो तेनो मोह रे,

दया करीने तेने पात्र बनावो त्यारे,

राखवो रे एमां घणो स्नेह रे … कुपात्रनी पासे

संशय टळे ने मनडुं गळे ने

राखे नहीं कोईना पर द्वेष रे,

गंगा रे सती एम बोलियां

एवाने देखाडवो हरिनो देश रे … कुपात्रनी पासे

No video for this text yet.Search on YouTube

Also read