BhaktiVed
Krishna

Lajja Mori Rakho Shyam Hari

BhajanAuthor: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

राखो रे श्याम हरि लज्जा मोरी, राखो श्याम हरि. टेक.

भीमही बेठे, अर्जुन ही बेठे, तेणे मारी गरज न सरी लज्जा०

दुष्ट दुर्योधन चीरने खेंचावे, सभा बीच खडी रे करी लज्जा०

गरुड चडीने गोविंदजी रे आव्या, चीरनां तो वा’ण भरी लज्जा०

बाई मीरां के प्रभु गिरिधरना गुण, चरणे आवी तो ऊगरी लज्जा०

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