BhaktiVed
कृष्ण

माई, मने मळिया मित्र गोपाल

भजनरचना: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

माई, मने मळिया मित्र गोपाल

माई, मने मळिया मित्र गोपाल, नहीं जाउं सासरे.

संसार मारुं सासरुं ने महियेर वैकुंठ वास,

लखचोरासी फेरा हतो ते, मूक्यो में मोहन पास ... नहीं जाउं.

सासु मारी सुकृत कहीए, ससरो प्रेम सुजाण,

नावलियो अविनाशी विश्वंभर, पामी हुं जीवनप्राण. ... नहीं जाउं.

साथी अमारा संत साधु, साधन धीरज ध्यान,

कर जोडी मीरां वीनवे, हवे पामुं न गर्भाधान. ... नहीं जाउं.

इस पाठ का वीडियो नहीं है।YouTube पर खोजें

ये भी पढ़ें