BhaktiVed
Krishna

Main Birhini Baithi Jagun

BhajanAuthor: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

मैं बिरहिणी बैठी जागुं

मैं बिरहिणी बैठी जागुं, जगत सब सोवै, री आली.

बिरहिणी बैठी रंगमहलमें, मोतियनकी लट पोवै,

इक बिरहिणी हम ऐसी देखी, अंसुअनकी माला पौवे. मै०

तरे गिन गिन रैन बिहानी, सुखकी घडी कब आवे ?

मीरां के प्रभु गिरिधर नागर, जब मोहि दरस दिखावे. मै.०

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