BhaktiVed
कृष्ण

मने रोके छे कानवर

भजनरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)

मने रोके छे. कानवर दाणीरे, नहिं जाउं जमना पाणीरे;

एकवार जमना पाणीरे गयांतां वहाला, मारी साथे सैयर समाणीरे. मने.

वृंदावनने मारग जातां, मारी नवरंग चुंदडी ताणीरे;

जोरे पाणी माकलवांरे होय तो, साथे मोकलो सैयर समाणीरे. मने.

मरकलडे मारां मन हरी लीधां, हुं तो लालचमां लपटाणीरे;

नरसैंयाचा स्वामीनी संगे रमतां, हुं तो मोहनसंगमां माणी रे. मने

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