BhaktiVed
Ram

Manvo Hoy To Ras

BhajanAuthor: ગંગાસતી (Gangasati)

माणवो होय तो रस

माणवो होय तो रस माणी लेजो पानबाई!

हवे आवी चूक्यो पियालो,

के'वुं हतुं ते कही दीधुं पानबाई!

हवे रे'णी पाळवा हेतथी हालो ... माणवो.

रे'णी थकी जोने राम रीझे पानबाई!

रे'णी थकी रोमरोम भींजाय,

रे'णी थकी रस शरीरमां परवरे,

रे'णी थकी उगावो जोने थाय ... माणवो.

रे'णी थकी गुरुजी सानमां समजावे,

रे'णी थकी अमर जोने थवाय,

रे'णी थकी अद्धर उतारा पानबाई!

रे'णी थकी पार पोगी जोने जवाय ... माणवो.

रे'णी ते सरवथी मोटी पानबाई!

रे'णीथी मरजीवा बनी जोने जाय;

गंगा रे सती एम बोलियां रे,

रे'णी पाळ्येथी आनंद वरताय ... माणवो

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