BhaktiVed
कृष्ण

मारे वर तो गिरिधरने वरवुं छे

भजनरचना: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

मारे वर तो गिरिधरने वरवुं छे

मारे वर तो गिरिधरने वरवुं छे,

हां रे बीजाने मारे शुं करवुं छे? रे ... मारे वर तो.

नंदना कुंवर साथे नेडलो बंधाणो रे,

हां रे मारे ध्यान धणीनुं धरवुं छे रे ... मारे वर तो.

अवर पुरुषनी मारे आश न करवी रे,

हां रे मारे छेडलो झालीने फरवुं छे रे ... मारे वर तो.

संसारसागर मोहजाळ भरियो रे,

हां रे मारे तारे भरोसें तरवुं छे रे ... मारे वर तो.

बाई मीरां कहे प्रभु गिरिधर नागर!

हां रे मारे रासमंडळमां रमवुं छे रे ... मारे वर तो.

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