BhaktiVed
माता

मारी वेणीमां चार चार फूल

garba

मारी वेणीमां चार चार फूल

मारी वेणीमां चार चार फूल,

अंबोडले सोहे, सोहामणी झूल

पहेलुं फूल, जाणे मारा ससराजी शोभता

जाणे पेलुं मोगरांनुं फूल

एनी सुवासे म्हेके घर घरनो ओरडो

गंभीरने सौमां अतुल

मारी वेणीमां चार चार फूल,

अंबोडले सोहे, सोहामणी झूल

बीजुं फूल, जाणे मारा सासुजी आकरा

जाणे पेलुं सूर्युमुखी फूल

सूरज उगतानी साथे मांडतु ए म्हेकवा

सांज सुधी काढतुं ए भूल

मारी वेणीमां चार चार फूल,

अंबोडले सोहे, सोहामणी झूल

त्रीजुं फूल, जाणे मारी नणंद पेली नानकी

जाणे पेलुं चंपानुं फूल

ज्यारे जुओ त्यारे खील्युं ने फाल्युं

मस्तीमां रहेतुं मशगूल

मारी वेणीमां चार चार फूल,

अंबोडले सोहे, सोहामणी झूल

चोथुं फूल, जाणे मारा हैयाना हारनुं

जाणे पेलुं रातराणी फूल

दिवसेना बोले ए मोटाना मानमां

रातडीए बोले बूलबूल

मारी वेणीमां चार चार फूल,

अंबोडले सोहे, सोहामणी झूल.

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