BhaktiVed
కృష్ణుడు

में तो हरिगुण गावत नाचुंगी

భజనరచన: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

मैं गिरिधर के घर जाऊं

मैं गिरिधर के घर जाऊं.

गिरिधर म्हांरो सांचो प्रीतम, देखत रूप लुभाउं;

रैन पडे तबही ऊठि जाउं, भोर भये ऊठि आउं. मैं०

जो पहिरावै सोई पहिरुं, जो दे सोई खाउं;

मेरी उनकी प्रीत पुरानी, उन बिन पल न रहाउं. मैं०

जहां बिठावै तीतही बैठुं,बेचै तो बिक जाउं;

मीरां के प्रभु गिरिधर नागर, बार नाअ बलि जाउं. मैं०

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