BhaktiVed
कृष्ण

में तो काया कारण भेख लीधा

भजनरचना: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

में तो काया कारण भेख लीधा

काया कारण भेख लीधा, राणाजी!

में तो काया कारण भेख लीधा.

रमता ने भमता जोगी आव्या आंगणिये मारे,

दासी जाणीने दर्शन दीधां ... राणाजी.

गिरिधरलाल विना घडी न गोठे राणा!

हरिरस घोळी घोळी पीधां ... राणाजी.

मोहने मोह कर्या कारमा अतिशे, राणा,

कंथा पहेरीने नेडा कीधा ... राणाजी.

बाई मीरां कहे प्रभु गिरिधरना गुण वहाला,

जंगले जईने डेरा दीधा ... राणाजी.

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