BhaktiVed
Ram

Miran Bhakti Karere Prakatki

BhajanAuthor: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

मीरां भक्ति करेरे प्रकटकी

मीरां भक्ति करे रे प्रकटकी ! नाथ तुम जानत हो सब घटकी; (ध्रु.०)

राममंदिर मीरां दर्शन आवत, ताल बजावत चटकी,

पायल घुघुरुं रुमझुम वागत, लाज संभाळो घुंघटकी ! मीरां०

ध्यान धरत मीरां धरणीधरनको ने सेवा करत खटपटकी,

शालिग्रामकुं तुलसी च्हडावत, भाल तिलक, मांही टपकी ! मीरां०

विखना प्याला राणाजीए भेज्या ने साधु संगत मीरां अटकी,

हरिचरणामृत करी पी गई मीरां, जेसी जानत अमृत घटकी. मी०

सुरदोरपर चली एक धारा ने सीर गगरीपर मटकी,

बाई मीरां कहे प्रभु गीरधर नागर, एसी सुरत बनी ज्यम नटकी ।

मीरां भक्ति करेरे प्रकटकी!

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