BhaktiVed
कृष्ण

नहीं मेलुं रे सुंदर श्याम

भजनरचना: પ્રેમાનંદ સ્વામી (Premanand Swami)

नहीं मेलुं रे सुंदर श्याम, कुंजविहारी रे;

हुं तो दाम विनानी नाथ, दासी तमारी रे.

तमे गुणवंत सुखना धाम, सारंगपाणी रे;

हुं तो हाथे तमारे नाथ - जी वेचाणी रे.

जेम राखो तेम रहुं नाथ, एक पगे ऊभी रे;

नहीं वरतुं कोई दिन नाथ, तमने दूभी रे.

तारा चरण तनी रज श्याम, थईने चालुं रे;

कहो तो व्रत राखुं व्रजराज, तमने व्यालुं रे.

जे कहेवुं घटे ते क्हान, मुजने कहेजो रे;

व्हाला प्रेमानंद पर नाथ, राजी रहेजो रे.

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