BhaktiVed
कृष्ण

नानुं सरखुं गोकुळियुं

भजनरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)

अवतारलीला

राग बिहागरा - ताल तिताला

नानुं सरखुं गोकुळियुं, मारे विठ्ठले वैकुंठ कीधुं रे,

ब्रह्मादिकने स्वप्ने न आवे, आहीरने दर्शन दीधुं रे. नानुं०

खटदर्शने खोळ्यो न लाधे, वेद पुराण एम गाये रे;

अवनवी लीला वृन्दावनमां, वन वन धेन चरावे रे. नानुं०

पुरुषोत्तम लीला अवतारी, देह धर्या अविनाशी रे;

कर जोडीने कहे नरसैंयो, गोवाळिया वैकुंठवासी रे. नानुं०

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