BhaktiVed
Krishna

Nathane Nirkhi

BhajanAuthor: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)

नाथने नीरखी

आज मारां नयणां सफळ थयां नाथने नीरखी,

सुंदर वदन निहाळीने मारा हैयामां हरखी.

जे रे मारा मनमां हुतुं ते वहालाए कीधुं;

प्रीते-शुं प्रभुजी पधारिया, आवी आलिंगन दीधुं.

वहालो मारो विहारीलो, तेहने जावा न दीजे;

हाथ थकी नव मूकीए, अंतरगत लीजे.

कालिंद्रीने कांठडे, हरि नाचे ने गाये,

स्वर पूरे सरव सुंदरी, अति आनंद थाये.

धन्य जमुनाना तटने, धन्य व्रजनो रे वास;

धन्यभाग्य आ भूमिनां, वहालो रम्या छे रास.

अमरलोक अंतरिक्षथी शोभा जोवाने आवे;

पुष्पवृष्टि तांहां थई रही, नरसैंयो वधावे.

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