BhaktiVed
कृष्ण

ओ आवे हरि हसता

भजनरचना: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

ओ आवे हरि हसता

ओ आवे हरि हसता, सजनी ! ओ आवी हरि हसता;

मुज अबळा एकलडी जाणी, पीतांबर के'डे कसता.

पंचरंगी पाघा केसरिया रे वाघा, फूलडां महेल्यां तोरा;

माहारे आंगणिये द्राख बिजोरां, मेवले भराउं ताहरा खोळा.

प्रीत करे तेनी पूंठ न मेले, पासेथी ते नथी खसता;

मीरां के प्रभु गिरिधरना गुण, व्हालो ह्रदयकमलमां वसता.

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