BhaktiVed
ॐ

Paripurn Satsang Have Tamane Karavun

BhajanAuthor: ગંગાસતી (Gangasati)

परिपूर्ण सतसंग हवे तमने करावुं

परिपूर्ण सतसंग हवे तमने करावुं,

ने आपुं जोने निर्मळ ज्ञान रे,

जनमवा मरवानुं तमारुं मटाडीने

धरावुं अविनाशीनुं ध्यान रे ... परिपूर्ण.

नामरूपने मिथ्या जाणो ने

मेली देजो मननी ताणावाण रे,

आवो बेसो एकांतमां ने तमने,

पद आपुं निर्वाण रे ... परिपूर्ण.

सदा रहो सतसंगमां ने

करो अगमनी ओळखाण रे,

नुरत सुरतथी निज नाम पकडीने

जेथी थाय हरिनी जाण रे ... परिपूर्ण.

मेल टळे ने वासना गळे,

न करो पुरणनो अभियास रे,

गंगा रे सती एम बोलियां,

थाय मूळ प्रकृतिनो नाश रे ... परिपूर्ण.

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