BhaktiVed
Krishna

Phagun Ke Din Char

BhajanAuthor: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

फागुन के दिन चार

फागुन के दिन चार होली खेल मना रे

बिन करताल पखावज बाजै

अनहदकी झनकार रे

बिन सुर राग छतीसूं गावै

रोम रोम रणकार रे ... फागुन के दिन

शील संतोष की केसर घोली

प्रेम प्रीत पिचकार रे,

उडत गुलाल लाल भयो अंबर,

बरसत रंग अपार रे ... फागुन के दिन

घटके सब पट खोल दिये हैं

लोकलाज सब डार रे,

मीरां के प्रभु गिरधर नागर

चरणकमल बलिहार रे ... फागुन के दिन

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