BhaktiVed
ॐ

पी लेवो होय तो रस पी लेजो

భజనరచన: ગંગાસતી (Gangasati)

पी लेवो होय तो रस पी लेजो

पी लेवो होय तो रस पी लेजो पानबाई

पियालो आव्यो भक्तो काळनो

वखत वीती गया पछी पस्तावो थाशे ने

अचानक खाशे तमने काळ रे .... पी लेवो होय

जाणवी रे होय तो वस्तु जाणी लेजो पानबाई

नहिंतर जमीनमां वस्तु जाशे रे,

नखशीख गुरुजीने हृदयमां भरीए रे

ठालववानुं ठेकाणुं कहेवाशे रे ... पी लेवो होय

आप रे मूवा विना अंत नहीं आवे ने

गुरु ज्ञान विना गोथां खाशे रे,

खोळामां बेसाडी तमने वस्तु आपुं

आपवापणुं तरत जडी जावे रे .... पी लेवो होय

वखत आव्यो छे तमारे चेतवानो पानबाई

मन मेलीने थाओ होंशियार रे,

गंगा सती एम बोलिया रे

हेतना बांधो हथियार रे .... पी लेवो होय

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