BhaktiVed
Ram

Prabhuji Sathe Prit Na Kidhi

BhajanAuthor: પ્રીતમ (Pritam)

पद ५६ राग गोडी.

प्रथम प्रभुजी साथे प्रीत न कीधी, एने मूआ टाणे संत बनावो रे;

तुलसी मंगावो अने तिलक कढावो, मुखे रामनाम लेवरावो रे... टेक

दव लाग्या रे पछी कूप खोदावो, ई केई पेरे अग्नि ओलाशे रे;

धन हतुं ते चोर ज लई गया, पछी दीवो करे शुं थाशे रे....

प्रथम प्रभुजी साथे १.

मात पिता सुत भाई ने भगिनी, ई सब ठगनकी टोळी रे;

प्रीत लगाडी तारुं सर्व लूंटी लेशे, पछी रहेशे आंख्यो चोळी रे...

प्रथम प्रभुजी साथे २.

बालपणुं रमतां खोयुं, जुवानीमाम् वाहाली जुवती रे;

बुढ्ढापणे छोकरां वाहालां, पछी मुवे ते मागी मुक्ति रे...

प्रथम प्रभुजी साथे ३.

खाधुं नहीं एणे खरच्युं नहीं, अने दान मान नव दीधुंरे;

हरिगुरु संतनी सेवा न कीधी, राम नाम न लीधुंरे...

प्रथम प्रभुजी साथे ४.

तळाव फाट्या पछी पाळ बंधावो, ई कई पेरे नीर ठेराशे रे;

कहे प्रीतम प्रीते हरि भजन विना, अवसर एळे जाशे रे...

प्रथम प्रभुजी साथे ५.

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