BhaktiVed
कृष्ण

प्रेम थकी अमने प्रभुजी मळ्या

भजनरचना: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

प्रेम थकी अमने प्रभुजी मळ्या

नित्य नित्य भजीए तारुं नाम, तारुं नाम,

प्रेम थकी अमने प्रभुजी मळ्या हो जी.

आणी तीरे गंगा व्हाला! पेली तीरे जमना,

वचमां गोकुळियुं रूडुं गाम रे ... प्रेम थकी.

वृंदा ते वनना चोके रास रच्यो छे, व्हाला!

सोळसे गोपीमां घेलो कान रे ... प्रेम थकी.

अन्न न भावे, नयणे निंद्रा न आवे, वहाला!

से’जे पधारो सुंदरश्याम रे ... प्रेम थकी.

बाई मीरां के प्रभु! गिरिधरना गुण वहाला!

छेल्ली घडीना रामोराम रे ... प्रेम थकी.

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