BhaktiVed
ॐ

पृथुराज चाल्या स्वधाम त्यारे

भजनरचना: ગંગાસતી (Gangasati)

पृथुराज चाल्या स्वधाम त्यारे

पृथुराज चाल्या स्वधाम त्यारे

सनकादिक आव्या तेने द्वार रे,

राजयोगनो अभ्यास बताव्यो

जेथी प्होंची गया पराने पार रे ... पृथुराज

उध्धवे कृष्ण साथे संवाद कीधो

बताव्युं प्रणव केरुं ध्यान रे,

प्रणव जीत्या ने परमगति पाम्या

जेथी प्रगट्युं निर्मळ ज्ञान रे ... पृथुराज

पांच प्राणनी गति एणे जाणी रे,

भाळ्या त्रिगुणातीत अविनाश रे,

कृष्णाकार सर्वे जगत जणायुं

जेनो रोमेरोममां वास रे ... पृथुराज

एकाग्र चित्त करी अभ्यास आदरो

तो लागे त्रिगुणातीतमां तार रे,

गंगासती एम रे बोलियां रे, पानबाई

तमे भाळो एने निर्धार रे ... पृथुराज

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