BhaktiVed
Krishna

Radha Govaldina Ghar Pachhvade

garba

राधा गोवालडीना घर पछवाडे

राधा गोवालडीना घर पछवाडे

मोहन मोरली वगाडे जो,

ई रे वागे ने मुने सटपटी लागे

नैणो मां नींदर न आवे जो

सरखी सहेली मळी गरबे घुमता

राधिकाने काळीनाग डंख्यो जो

डाबे अंगूठडे सर्पडंख दीधो

तनमां लाह्युं लागी जो

वाटकीमां वाटिया ने खांडणीमां खांडिया

ओहळीया लेप लगाव्या जो

तो ये राधिकाना विषना उतर्या

बमणी लाह्युं लागी जो

पाटण शहेरथी वैद तेवाड्या

वीरा मारा विषडा उतारो जो

साव रे सोनानो मारो हारलो रे आलुं

रूपले तुने मठावुं जो

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