BhaktiVed
Ram

Ram Shabadni Mala

BhajanAuthor: ખીમ સાહેબ (Khim Saheb)

राम शबदनी माळा

राम शबदनी माळा राटोने वाहला

टाळे जनमना जंजाळा संतो वहाला... हे जी रे.

कूंची करी ले गुरु ज्ञाननी खोले ई मोहना तारे हे जी

ई ताळाने दूर करो तो घट भीतर अजवाळा संतो

राम शबदनी माळा रे हे जी....

आ कायामां परगट गंगा शीद फरो पंथ काळा रे हे जी...

ई गंगामां अखंड नहाई ल्यो मत नाव नदीयुं ने नाळा संतो

राम शबदनी माळा रे हे जी....

आ कायामां बुद्धि समुंदर चलत नाव चोधारा रे हे जी.

ते नावमां हीरला ने माणेक खोजे खोजन हारा संतो

राम शबदनी माळा रे हे जी....

आपे समजले समरण करी ले चितमां कर तुं चाळा हे जी

खीम साहेब कहे भाण प्रतापे हरदम बोले प्यारा संतो

राम शबदनी माळा रे हे जी....

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