BhaktiVed
राम

रामने भज्या विना

भजनरचना: રવિ સાહેબ (Ravi Saheb)

रामने भज्या विना

रामने भज्या विना पार नहीं पामो,

हे जी आतो धुताराना शहेर छे.

जन्म्यो ते’दी शुं बोलतो बंदा,

आजनी बोलीमां घणो फेर छे.

करी कमाणी तारी चोपडे चडशे,

लेखा लेवाने धणी मारो तेडशे. रामने भज्या.. १

मोटाई तारी रे बंदा नथी मेलतो,

ई रे मोटायुं तने वेडशे.

धन रे दोलतमां तारु मनडुं लोभाणुं,

प्रभुना भजनमां तने वेर छे. रामने भज्या.. २

भवसागरमां साचा रे मोती,

छीपे छीपे घणो फेर छे.

बावा थया तेथी शुं रे थयुं भाई,

प्याले प्याले घणो फेर छे. रामने भज्या.. ३

कहे रविराम गुरु भाण प्रतापे,

दिधा विना क्यांथी पामशो.

देजो ने लेजो, करजो भलायुं,

अहीयां तो प्रभुनी घणी महेर छे. रामने भज्या.. ४

रामने भज्या विना पार नहीं पामो,

हे जी आतो धुताराना शहेर छे.

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