BhaktiVed
ॐ

रमीए तो रंगमां रमीए

भजनरचना: ગંગાસતી (Gangasati)

रमीए तो रंगमां रमीए

रमीए तो रंगमां रमीए पानबाई,

मेली दई लोकनी मरजाद रे,

हरिना देशमां त्रिगुण नव मळे,

न होय त्यां वादविवाद रे ... रमीए

कर्तापणुं कोरे मूकीने रमतां

आवशे परपंचनो अंत रे,

नवधा भक्तिमां निर्मळ रहेवुं

एम कहे छे वेद ने संत रे ... रमीए

सांगोपांग एकरंग थईने रमो

लागे नव बीजो रंग रे,

साचानी संगे कायम रमतां

करवी भक्ति अभंग रे ... रमीए

त्रिगुणरहित थई करे नित करम

एने लागे नहीं कर्तापणानो डाघ रे,

गंगा सती एम बोलियां पानबाई

तेने नडे नहीं करमनो भाग रे ... रमीए

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