BhaktiVed
कृष्ण

राणाजी, मैं तो गोविंद के गुण गाशुं

भजनरचना: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

राणाजी, मैं तो गोविंद के गुण गाशुं.

राजा रुठे नगरी राखे,

हरि रुठ्यां कहां जाशुं .... राणाजी

हरिमंदिर में निरत कराशुं,

घूघरियां घमकाशुं .... राणाजी.

राम-नामका जाप चलाशुं,

भवसागर तर जाशुं ... राणाजी.

यह संसार बाड का कांटा,

ज्यां संगत नहीं जाशुं ... राणाजी.

मीरां कहे प्रभु गिरिधर नागर,

नित उठ दरशन पासुं .... राणाजी.

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