BhaktiVed
कृष्ण

रुमझुम रुमझुम नेपूर वाजे

भजनरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)

रुमझुम रुमझुम नेपूर वाजे

रुमझुम रुमझुम नेपूर वाजे,

ताळी ने वळी ताल रे;

नाचंता शामळियो-श्यामा,

वाध्यो रंग रसाळ रे ... रुमझुम रुमझुम

झाल झबूके राखलडी रे,

मोर-मुगट शिर सोहे रे;

थेई थेई थेई तहां करती कामा,

मरकलडे मन मोहे रे ... रुमझुम रुमझुम

कोटिकला तहां प्रगट्यो शशियर,

जाणे दिनकर उदियो रे;

भणे नरसैंयो महारस झीले,

मानिनी ने महाबळियो रे ... रुमझुम रुमझुम

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