BhaktiVed
कृष्ण

समीरे सांजना सोडमां सुता

भजनरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)

समीरे सांजना सोडमां सुतां, नणदलीए साद कीधो रे;

हवुं प्रभात पीयु थयो घेलो, उंघरेटो जई सूतोरे.

हरिनुं पीतांबर सेजे रह्युंरे, पालटीने पटफूल गयो;

क्यम कदी वनजाउंरे मही वेंचवा, दुरिजन लोकबोल कह्यो रे.

दीठडे डाढ गळे, असतीआ बहु बळे, तो अभिमान शुं करीए;

नरसिंहाचो स्वामी भले मळियो, भवसागर उतरीएरे.

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