BhaktiVed
ॐ

संतो भाइ भुवन जीत्या भव सारा

భజనరచన: ભોજા ભગત (Bhoja Bhagat)

संतो भाइ भुवन जीत्या भव सारा

संतो भाइ भुवन जीत्या भव सारा. टेक०.

अनंत लोचन अंतर ऊघडियां; नीरख्या नाट निराळा. संतो०

मनमंदिर दीपक दरशाना, ऊघडी गयां तनताळां;

रंग लाग्यो ने रवि प्रगटियो, अनेक दिशे अजवाळां. संतो०

करण वर्ण जेणे मरण मिटाया, चरण ग्रह्यां छोगाळा;

छूटी गयां चेन घेन, घनघोरा, भास्या ब्रह्म रसाळा. संतो०

गगन गाजे त्यां अनहद वाजे, सद्गुरुकी सान शिखाया;

भोजो भगत कहे प्रेम पियालो, पीतां नयने नीर झलकाया. संतो०

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