BhaktiVed
Ram

Saphal Ragyi Hui

BhajanAuthor: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)

सफल रजनी हुई आजनी अभिनवी, पलंग बेसाडी वाहाले हास्य कीधुं;

कर दर्पण धरी वदन अविलोकवा, प्रेमनुं चुंबन गाले कीधुं.

कुसुमना टोडर कंठ भूषण धरी, भूज भीडी भुधरे ह्रदया साथे;

सुस्त संग्रामशुं हुं एने जई भडी, जीत्यो यदुनाथ द्वय बाहु बाथे.

मदनना सैन्यशुं मान माग्युं घणुं, जुद्ध जीत्युं रण हाथ आव्युं;

चौद भुवनतणो नाथ में वश कर्यो, अजित जीत्यातणुं बिरद कहाव्युं.

जेम गजयुवति मातंग मदगलीता, सुंदरी सेज हरिसिंह आव्यो;

नरसिंहाचा स्वामी सुभट सुरासुर, केसरी कान साही नचाव्यो.

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