BhaktiVed
कृष्ण

शरदपूनम तणो दिवस आव्यो

भजनरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)

शरदपूनम तणो दिवस आव्यो

शरदपूनम तणो दिवस आव्यो तिंहा, रास-मरजादनो वेण वाह्यो;

रूकमणि आदि सहु नार टोळे मळी, नरसैंये तहां ताल साह्यो. -शरद. १

पुरुष पुरुषातन लीन थयुं माहरुं, सखीरूपे थयो मध्य गावा;

देहदशा सौ टली मांहे रह्यो भळी, दूती थई मानिनीने मनावा. -शरद. २

हावने भाव रसभेदना प्रीछिया, अनुभवता रसबस रे थातां;

प्रेमे पीतांबर आपियुं श्रीहरि, रीझिया कृष्णजी ताल वा'तां. -शरद. ३

व्रज तणी आद्यलीलानुं दरशण हवुं, अरुण उदये शंखनाद कीधो;

रूकमणि आदि सहु नारी त्रपत थई, रामाए कंठथी हार दीधो. -शरद. ४

'धन्य धन्य तुं' एम कहे श्रीहरि, 'नरसैंयो भक्त हुं-तुल्य जाणो;

व्रज तणी नारी जे भाव-शु भोगवे, तेहने प्रेम-शु सहेजे माण्यो.' -शरद. ५

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