BhaktiVed
Krishna

Sheri Valavi Sajj Karun

BhajanAuthor: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)

शेरी वळावी सज्ज करुं

आ…. शेरी वळावी सज्ज करुं, घरे आवो ने !

आंगणिये पथरावुं फूल, वालम घरे आवो ने.

आ…. उतारा देशुं, ओरडा घरे आवो ने;

देशुं देशुं मेडीना मोल, मारे घरे आवो ने… शेरी..

आ…. दातण देशुं दाडमी घरे आवो ने

देशुं कणेरी कांब, मारे घरे आवो ने… शेरी..

आ…. नावण देशुं कुंडियुं घरे आवो ने,

देशुं देशुं जमनाजीना नीर मारे घरे आवो ने… शेरी..

आ…. भोजन देशुं लापशी घरे आवो ने !

देशुं देशुं साकरियो कंसार, मारे घरे आवो ने… शेरी..

आ…. रमत-देशुं सोगठी घरे आवोने,

देशुं देशुं पासानी जोड, मारे घरे आवो ने… शेरी..

आ…. पोढण देशुं ढालिया, घरे आवोने,

देशुं देशुं हिंडोळा खाट, मारे घरे आवो ने… शेरी..

आ…. महेता नरसैयाना स्वामी शामळिया,

हां रे अमने तेडी रमाड्या रास, मारे घेर आवो ने… शेरी..

No video for this text yet.Search on YouTube

Also read