BhaktiVed
माता

स्थिरताए रहेजो ने वचनमां चालजो

भजनरचना: ગંગાસતી (Gangasati)

स्थिरताए रहेजो ने वचनमां चालजो

स्थिरताए रहेजो ने वचनमां चालजो,

ने राखजो रूडी रीत रे,

अजाण्या साथे वात नव करजो,

ने जेनुं मन सदा विपरीत रे ... स्थिरताए.

आगळ घणां महात्मा थई गया

ने तेणे कुपात्रनो कर्यो निषेध रे,

एक आत्मा जाणीने अज्ञानी प्रबोधियो

ने उपजावे अंतरमां खेद रे ... स्थिरताए

लिंग वासनामां जेनुं चित्त लाग्युं,

ने आसक्त छे विषयमांय रे,

एवाने उपदेश कदी नव करवो

ने जेने लागे नहि लेश उरमांय रे ... स्थिरताए.

उपाधि थकी आपणे निर्मळ रहेवुं

ने चुकवो नहि अभ्यास रे,

गंगा सती रे एम बोलियां रे,

त्यां टके नहि दुरजननो वास रे ... स्थिरताए.

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