BhaktiVed
कृष्ण

सुनी मैं हरि-आवन की अवाज

भजनरचना: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

राग रामदासी - ताल तिताला

सुनी हो मैं हरि-आवन की अवाज.

महल चढ-चढ जोउं मेरी सजनी, कब आवै महाराज,

दादुर मोर बपैया बोलै, कोयल मधुरे साज.

ऊमग्यो ईंद्र चहुं दिश बरसै, दामणी छोडी लाज,

धरती रूप नवा धरिया है, ईंद्र मिलन के काज

मीरां के प्रभु हरि अविनाशी, बेग मिलो सिरराज.

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