BhaktiVed
कृष्ण

तमे पधारो वनमाळी रे

भजनरचना: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

हां रे में तो कीधी छे ठाकोर थाळी रे,

पधारो वनमाळी रे ... हां रे में तो.

प्रभु कंगाल तोरी दासी, प्रभु प्रेमना छो तमे प्यासी,

दासीनी पूरजो आशी ... पधारो०

प्रभु साकर द्राक्ष खजूरी, मांहे नथी बासुंदी के पूरी,

मारे सासु नणदी छे शूळी ... पधारो०

प्रभु भातभातना लावुं मेवा, तमे पधारो वासुदेवा,

मारे भुवनमां रजनी रहेवा ... पधारो०

हांरे में तो तजी छे लोकनी शंका, प्रीतम का घर है बंका,

बाई मीरांए दीधा डंका ... पधारो०

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