BhaktiVed
कृष्ण

तेरा कोई नहीं रोकनहार

भजनरचना: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

तेरा कोई नहीं रोकनहार

तेरा कोई नहीं रोकनहार, मगन होय मीरां चली रे.

लाज सरम कुलकी मरजादा, सिरसे दूर करी;

मान-अपमान दोउ धर पटके, निकसी हुं गानगली.

ऊंची अटरिया लाल किवडिया, निरगुन सेज बीछी;

पंचरंगी झालर सुभ सोहै, फूलन फूलकली.

बाजूबन्द कडूला सोहै, सिंदूरमांग भरी;

समिरन थाल हाथमें लीन्हा, शोभा अधिक खरी.

सेज सुषमणा मीरां सोवे, सुभ है आज घरी;

तुम जावो राणा घर अपने, मेरी तेरी नहि सरी.

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