BhaktiVed
ॐ

वचन सुणीने बेठां एकांतमां

भजनरचना: ગંગાસતી (Gangasati)

वचन सुणीने बेठां एकांतमां

वचन सुणीने बेठां एकांतमां,

ने सुरता लगावी त्राटक मांय रे;

संकल्प विकल्प सर्वे छुटी गया,

ने चित्त लाग्युं वचनुंनी मांय रे ... वचन.

खानपाननी क्रिया शुद्ध पाळे,

ने जमावी आसन एकांत मांय,

जाति अभिमाननो भेद मटी गयो,

ने वरते छे एवां व्रतमान रे ... वचन.

चंद्र सूरजनी नाडी जे कहीए,

ने तेनुं पाळे छे व्रतमान रे,

चित्तमां मात्र जे वचन मूके,

क्रिया शुद्ध थई त्यारे अभ्यास जाग्यो,

ने प्रकट्युं निर्मळ ज्ञान रे

गंगा रे सती एम बोलियां रे,

कीधो वासनानो सर्व त्याग रे ... वचन.

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