BhaktiVed
ॐ

वचन विवेकी जे नरनारी

भजनरचना: ગંગાસતી (Gangasati)

वचन विवेकी जे नरनारी

वचन विवेकी जे नरनारी पानबाई ! तेने ब्रह्मादिक लागे पाय

जथारथ वचननी सान जेणे जाणी, तेणे करवुं पडे नैं बीजुं कांय...

वचन विवेकी जे नर नारी...

वचनमां समजे तेने महासुख उपजे ने, ई तो गत रे गंगाजी कहेवाय

एकमना थईने आराध करे तो तो, नकलंक परसन थाय...

वचन विवेकी जे नर नारी...

वचने थापन अने वचने उथापन, वचने मंडाय जो ने पाट रे

वचनना पूरा ते तो नहि रे अधुरा, वचननो लावो जो ने ठाठ…

वचन विवेकी जे नर नारी...

वस्तु वचनमां छे परिपूरण पानबाई, वचन छे भक्ति केरूं अंग

गंगासती एम बोलियां रे, करवो वचनवाळानो संग...

वचन विवेकी जे नर नारी...

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