BhaktiVed
कृष्ण

वहाला मारा वृंदावनने चोक

भजनरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)

वहाला मारा वृंदावनने चोक

वहाला मारा ! वृंदावनने चोक के वहेला पधारजो रे लोल;

गोकुळ गाम तणी व्रजनार के वेगे बोलावजो रे लोल.

अमने रास रम्याना कोड के नाथ-संग बेलडी रे लोल;

लेवा मुखडाना मकरंद के मळी तेवतवडी रे लोल.

रूडुं जमनाजी केरुं नीर के तट रळियामणो रे लोल;

रूडो बंसीवटनो चोक के चंद्र सोहामणो रे लोल.

मळियो व्रजवनितानो साथ के ताळी हाथ शुं रे लोल;

मानिनी मदमत्त भीडे बाथ के कोमळ गात शुं रे लोल.

फरती गान करे व्रजनार के वचमां श्रीहरि रे लोल;

कंकण-झांझरनो झमकरा के घमके घूघरी रे लोल.

जोवा मळिया चौदे लोक के ईन्द्र त्यहां आविया रे लोल;

रूडां पारिजातकना पुष्पे के प्रभुने वधावियां रे लोल;

ब्रह्मा रुद्र धरे एनुं ध्यान के पार पामे नहीं रे लोल;

नाचे नरसैंयो रसमग्न के जोई लीला नाथनी रे लोल.

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