BhaktiVed
Krishna

Vat Jue Chhe Miran Rankdi

BhajanAuthor: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

वाट जुए छे मीरां रांकडी रे,

ऊभी ऊभी अरज करे छे दीनानाथनी.—

मुनिवर स्वामी मारे, मंदिर पधारो रे;

सेवा करीश दिन-रातडी रे.—

फूलना ते हार ने फूलना गजरा रे;

फूलना तोरा ने फूल-पांखडी रे.—

पय पकवान वा’ला, मीठाई ने मेवा रे;

घेबर जलेबी तल-सांकळी रे.—

लविंग सोपारी ने पाननां बीडलां रे;

एलची दोडा ने तज पांखडी रे.—

साव सोनानां वा’ला, सोगठां ढळावुं रे;

रमवा आवो तो जाय रातडी रे.—

बाई मीरां के प्रभु गिरधर नागर;

जोतां ठरे छे मारी आंखडी रे.—

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