BhaktiVed
ॐ

Vijline Chamkare Motidan Parovo

BhajanAuthor: ગંગાસતી (Gangasati)

वीजळीने चमकारे मोतीडां परोवो

वीजळीने चमकारे मोतीडां परोवो रे पानबाइ !

नहितर अचानक अंधारा थाशे जी;

जोत रे जोतांमां दिवसो वही जशे पानबाइ !

एकवीस हजार छसोने काळ खाशे जी … वीजळीने चमकारे

जाण्या रे जेवी आ तो अजाण छे रे वस्तु पानबाइ !

अधूरियाने नो के’वाय जी,

गुपत रसनो आ खेल छे अटपटो,

आंटी मेलो तो समजाय जी … वीजळीने चमकारे

मन रे मूकीने तमे आवो रे मेदानमां पानबाइ !

जाणी लीयो जीव केरी जात जी;

सजाति विजातिनी जुगति बतावुं ने,

बीबे पाडी दउं बीजी भात जी … वीजळीने चमकारे

पिंड रे ब्रह्मांडथी पर छे गुरु पानबाइ !

तेनो रे देखाडुं तमने देशजी,

गंगा रे सती एम बोलियां रे संतो,

त्यां नहि मायानो जरीये लेश जी … वीजळीने चमकारे

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